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Posts of 13 Jan 16 Pratap Pawar's Dance program in Dewas














1942 में धार, मप्र में जन्मे और धार, देवास में पढ़े लिखे पद्मश्री प्रताप पवार कत्थक शैली के गुरु है और एक बड़े कलाकार जो अब लन्दन  में स्थाई रूप से बस गए है. भारत सरकार ने उन्हें त्रिनिनाद में कत्थक सिखाने के लिए भेजा था पर जब वे लन्दन  पहुंचे तो वही के होकर रह गए पर अच्छी बात यह है कि वे भारतीय संस्कार और गुरु शिष्य परम्परा के वाहक है और लगभग 73 वर्ष की उम्र में भी काम करने का जज्बा देखते ही बनता है. पिछले 35 बरसों से वे साल में दो बार भारत आते है और प्रस्तुतियां देते है. 

कल इंदौर में सफल प्रस्तुति के बाद आज देवास में उन्होंने प्रस्तुति दी अपने चार शिष्यों के साथ जिनमे से दो विदेशी थी, साथ ही एक विदेशी शिष्या ध्वनी और लाईट का प्रबंधन देखने आई थी. देवास के मल्हार स्मृति मंदिर का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सन 1952 में इस स्टेज से पहली बार नृत्य की सार्वजनिक प्रस्तुति दी थी और आज वे इतने सालों बाद यहाँ लौटे है. उन्होंने कहा कि जब वे यहाँ थे तो सोचा नहीं था कि जीवन में कुछ कर पायेंगे और उनमे आत्मविश्वास की बहुत कमी थी. बाबा साहब महाडिक ने उनमे जोश और उत्साह भरा और वे आज जो कुछ भी है उन्ही की बदौलत है. पंडित बिरजू महाराज के पहले गंडा बंध शिष्य है और उसी परम्परा को निभाते हुए उन्होंने देशी विदेशी एक हजार शिष्यों  को कत्थक नृत्य की शिक्षा दी है. 

आज उन्होंने प्रस्तुति दी परन्तु अब उनके शरीर पर उम्र का असर दिखता है, जोश जरुर बना हुआ है, पर घुंघरू और पैरों के तालमेल पर अब समन्वय कम हो रहा है, लम्बे अभ्यास के बाद भी साँस फूलने का एहसास माईक पर स्पष्ट नजर आता है फिर भी प्रताप पवार उन लोगों में से है जो अभी भी इस साधना में प्रयोग भी कर रहे है, हालांकि वे अभी भी अपने घराने और प्रस्तुतियों में ही दम भरते है पर आज उन्होंने भारत में रहे अंतिम मुग़ल शासक बहादुर शाह जफ़र की नज्म "दो जमीन ना मिली कूचा ए यार में" की नाट्य प्रस्तुति दी जो बेहद कमजोर थी. 

उनके शिष्य अभी सीखने के स्थिति से गुजर रहे है फिर भी कुछ प्रस्तुतियां ठीक थी. देवास जैसे शहर में जहां संगीत नृत्य के कार्यक्रम बरसों में बिरले ही होते है, के लोगों के लिए यह कौतुक भरा कार्यक्रम था पर कत्थक ने पिछले बरसों में जो मुकाम हासिल किये है वे आज मंच पर नजर नहीं आये और कत्थक को पुराने स्वरुप में देखना थोड़ा मुश्किल लगा. हालांकि ये दीगर बात है कि स्व पंडित कुमार गन्धर्व जी जब थे तो देवास के इसी मंच से बड़े से बड़े कलाकारों ने अप्रतिम और अभूतपूर्व कार्यक्रम दिए है और देवास के श्रोता भी बेहद संजीदा और परिपक्व लोग है जो बारीकी से संगीत और नृत्य को जानते है. 

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग, जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान, पूर्व और वर्तमान महापौर द्वय, कलापिनी, भुवनेश कोमकली और साहित्यकार उपस्थित थे. 

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समय के साथ मित्रता एक व्यवसाय और असीमित अपेक्षाओं के लबादे में तब्दील हो जाती है, हम सिर्फ इस व्यवसाय के घाटे में रहने वाले भागीदार बनकर रह जाते है जिसमे लाभांश कुछ नही रहता सिवाय शोषण के।

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