Skip to main content

Posts of 16 Nov 15



मुझे आप निगेटिव कहें या कुछ और, फर्क नहीं पड़ता पर मेरे सवाल है कोई ज्ञानी जवाब दे दें तो आभारी रहूंगा.......... सिर्फ थोड़े से सवाल है.....

1) गाय उर्फ़ बीफ उर्फ़ मांस के मुद्दे कहाँ गए और अब सब शांत क्यों है.? 

2) जम्मू कश्मीर से लेकर छग तक में आतंकवादी उर्फ़ नक्सलवादी उर्फ़ मिलिटेंट चुप क्यों है?

3) वो पंजाब हरियाणा में डेरा सच्चा सौदा से लेकर तमाम बाबाओं के डेरों का क्या हुआ और जिन लोगों ने कई दिनों तक रोड जाम करके रखे और अपने परम आराध्य को गिरफ्तार नहीं होने दिया उस पर क्या कार्यवाही हुई? 

4) श्रीराम मंदिर का निर्माण कब होगा मै स्वयं जाकर कारसेवा भी करना चाहता हूँ और चन्दा देना चाहता हूँ पर निर्माण शुरू होने के बाद और दरवाजों की ऊँचाई होने के बाद .

5) धारा 370 का खात्मा कब होगी, क्या है शुगर और ब्लड प्रेशर की वजह से गर्मी बहुत होती है चाहता हूँ कि बुढापे में कश्मीर में एक छोटा सा मालिकाना प्लाट खरीदकर एक आशियाना बना लूं ताकि शान्ति से ठन्डे प्रदेश में रह सकूं. 

6) मप्र में व्यापमं में अब कोई आत्महत्या उर्फ़ मौत उर्फ़ ह्त्या क्यों नहीं हो रही, सी बी आई क्या कर रही है? 

7) मप्र के पेटलावद में हुए भयानक विस्फोट का मुख्य आरोपी राजेन्द्र कास्वा क्यों और किसकी शह पर गायब है और अभी तक गिरफ्तार नहीं हुआ और अभी के चुनावों में सभी बड़े नेता पेटलावद और आसपास रात्री निवास क्यों कर रहे है? 

8) माँ गंगा की सफाई का क्या हुआ, चाहता हूँ कि काशी नाथ सिंह की किताब असी का काशी को दुत्कारते हुए बनारस के घाटों पर जाकर एक बार गंगा में डूबकी लगाना चाहता हूँ ताकि मोदी जी और बाकी सबको दिए गए उलाहनों का पाप धुल जाएँ. 

ज़रा शांत होकर जवाब दें और जो लोग अपना दिमागी मवाद खाली करना चाहते है वे कृपया सुलभ का सहारा लें, यहाँ उल्टी ना करें.........

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...