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जिन्दगी के सफ़र में गुजर जाते है जो मकाम

दृश्य एक:-

लखनऊ का हजरतगंज और फूटपाथ पर टी शर्ट की दुकानें, मै पास बैठा कुछ खा रहा हूँ, किसी साथी का इंतज़ार कर रहा हूँ कि देखता हूँ एक युवा जो लखनऊ विवि से पीएचडी कर रहा है (उसने बाद में बताया था) कार्ल मार्क्स की तस्वीर वाला टी शर्ट खरीदता है जिस पर बाकायदा कार्ल मार्क्स का फोटो है दाढी वाला और लिखा है "Doubt Everything", मैंने सहज ही पूछा कि भाई मार्क्स से ज्यादा प्रभावित हो क्या, तो बोला "जी अंकल, एमए में तो अच्छे मार्क्स थे, अब तो शोध है ना, तो मार्क्स का सवाल ही नहीं है", मैंने फिर टटोला और कहा ये तस्वीर वाले मार्क्स बाबा, इशारा भी किया शर्ट की तरफ तो बोला "ओह ये, पता नहीं, क्या है ना मेरी साली गर्ल फ्रेंड मुझ पर बहुत डाउट करती है हमेशा, उसे रिझाने के लिए ये खरीदा है क्योकि इस पर लिखा है Doubt Everything ..........." हे कार्ल मार्क्स.........कहाँ थे तुम, जब ये टी शर्ट पर तुम्हारा चित्र स्क्रीन प्रिंट किया जा रहा था...........


दृश्य दो:-

देवास में मित्र बहादुर के साथ ए बी रोड से घर आ रहे थे तो देखा एक युवा मस्त वाली 'चे ग्वारा' के चित्र वाली टी शर्ट पहनकर तेज़ बाईक चलाते हुए बड़ी रफ़्तार से जा रहा था, मैंने बहादुर से कहा कि यार ज़रा तेज चलाओ देखें ये देवास में 'चे ग्वारा की टी शर्ट' पहनने वाला क्रांतिकारी कौन है, इसे अपने ओटला मंच से जोड़ो भाई. बहादुर ने कार तेज भगाई और उस युवा के समानांतर हम चलने लगे , मैंने जोर से आवाज देकर उससे पूछा कि ये 'चे ग्वारा' को जानते हो तो बोला कौन चे? मैंने कहा तुम्हारी टी शर्ट पर जिसके चित्र बने है और सारे टी शर्ट पर क्रान्ति के नारे लिखे है, तो बोला पता नहीं मैंने क्रान्ति फिल्म नहीं देखी. हे चे ग्वारा कहाँ थे तुम, जब ये टी शर्ट पर तुम्हारा चित्र स्क्रीन प्रिंट किया जा रहा था...........

फिर समझ में आया कि या तो हम अनजाने में टी शर्ट खरीद लेते है या फिर हम कुछ जानते नहीं या उस लिखे को आत्मसात नहीं कर पातें है और बस अपनी ही धुन में कुछ भी पहनना और कुछ भी ओढ़कर चल देना यही केजुअली करते रहते है. खैर.........इसके बाद मैंने अपनी तमाम ऐसी टी शर्ट्स देखी जिन पर कुछ ना कुछ लिखा था..मेहरबानी करके आप भी एक बार टटोल लीजिये...........कही मेरे जैसा खूसट आदमी आपको रास्ते में मिल जाए और पूछ बैठे तो..............  
 

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