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हम जो घरों से एक बार बाहर निकले हैं तो अब वहां लौटकर नहीं जाएंगे। - मनीषा पांडेय

पूरी तरह सहमत हूँ मनीषा पांडेय से, आज यह जोखिम लिए बिना मूंछों वाले निकम्मे, नालायक मर्द तुम्हें ना इज्जत देंगे ना स्वतन्त्रता ...........और सरकार से बड़ा नपुंसक कोई नहीं है जो क़ानून के नाम पर हजारों सालों तक लोकसभा-राज्यसभा के दायरे में खेल खेलती रहेगी, जैसे महिला आरक्षण के साथ पिछले कई बरसों से खेल रही है और इसमे वो सारी महिलायें भी शामिल है जो संसद में टसुए बहाने का नाटक करती है और सत्ता के खेल में रोज नए सौदे करती है.
 
लड़कियों !

1- अपने घरों से बाहर निकलो ।
2- पब्लिक स्‍पेस पर कब्‍जा करो। यकीन करो, धरती की हर इंच जगह तुम्‍हारी है और तुम्‍हें कहीं भी जाने-होने-रहने-जीने से कोई रोक नहीं सकता।
3- जान लगाकर पढो, टॉप करो और अपना कॅरियर बनाओ। (करियर टॉप प्रिऑरिटी पर रखो।)
4- अपने पैसे कमाओ, अपना घर बनाओ। अपना कमरा और अपना स्‍पेस।
5- एक गाडी खरीदो, दो पहिया या चार पहिया, कुछ भी चलेगा। और उस पर सवार होकर पूरे शहर में घूमो, दूर दराज के शहरों में भी। चाहो तो पूरे देश भर में।
6- अपनी जिंदगी की जिम्‍मेदारी अपने हाथों में लो। अपने फैसले खुद करो।
7- अमीर पति का ख्‍वाब छोड दो। अमीर पति से मिलने वाली सुविधाओं के साथ गुलामी भी आती है। ये पैकेज डील है। सिर्फ एक चीज नहीं मिलेगी।
8- प्रेम करो, अपना सेक्‍चुअल पार्टनर खुद अपनी मर्जी से चुनो।
9- सजो-संवरो और सुंदर दिखो।
9- किताबें पढो और अच्‍छा सिनेमा देखो। (प्‍लीज लड़कियों, सलमान खान को देखकर आहें भरना बंद करो।)
10- अपने कमाए पैसे जमा करो और उस पैसों से पूरी दुनिया घूमो। सुंदरवन के जंगलों और कन्‍याकुमारी के समुद्र तट पर अकेले जाओ। मेरी यकीन करो, अगर हम समझदार, बुद्धिमान और आत्‍मविश्‍वास से भरे हैं तो हमारे साथ कुछ नहीं होगा। और यदि कुछ बुरा हो भी गया तो इसका ये मतलब नहीं कि अगली बार हम सुंदरवन नहीं जाएंगे।

हम जो घरों से एक बार बाहर निकले हैं तो अब वहां लौटकर नहीं जाएंगे।

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