Skip to main content

शुचिता और वैभव कुत्तों की भाषा में सुरक्षित है

श्वान  १

आजकल देर तक जागता हूँ तो
कुत्तों की आवाजें सुनता रहता हूँ
कुत्तों की लड़ाईयां सुनता रहता हूँ
एक साथ कई कुत्ते निकलते है
झुण्ड में और टूट पड़ते है किसी
अकेले दुबककर बैठे कुत्ते पर
या
किसी हड्डी चबाते कुत्ते पर
या
अपनी पूंछ चाटते कुत्ते पर
या
किसी बंगले में बंधे कुत्ते पर
जोर से भूंकने लगते है
बावजूद इसके कि वहाँ लिखा है
कुत्ते से सावधान !
कई बार उलटा भी हो जाता है
एकाध कुत्ता ही इस झुण्ड पर
भारी पड  जाता है
और उसके बगैर उठे ही यानी
गुर्राने से या सिर्फ अँधेरे में
चमकती आँखें देखकर पूरा झुण्ड
मिमियाते हुए बिखर जाता है
आजकल कुत्तों के बारे में बहुत सोचता हूँ मै
क्यों कि कुत्तों के भाव बढ़ रहे है
और नस्लें भी एक से एक नई आ गयी है
कुत्तों की दवाईयां, शैम्पू, साबुन, बिस्किट और
कुत्तों के लिए मांस के लोथड़े क्यों एकाएक आ गए है
बाजार में ...........!!!

श्वान २

बहुत सोचा गया कुत्तों के
साहित्य के बारे में
उसकी प्रासंगिकता और सन्दर्भों के बारे में
कुत्तों के साहित्य में छायावाद और प्रयोगवाद के बारे में
शोध तक प्रकाशित हुए परन्तु फ़िर भी
तर्क सम्मत ढंग से आलोचक कुत्तों ने अपना
पक्ष या वैचारिकी नहीं प्रस्तुत की
कुत्तों के साहित्य के बारे में
विभिन्न विमर्श और जेंडर
के बारे में भी बातें हुई
और विस्तार से लिखी गयी कहानी पेज दर पेज
परन्तु कही कोई प्रामाणिकता
नज़र नहीं आई.
पीठ, अकादमियां बनी और ठीक इंसानों की तरह से
प्रशासनिक कद के हैसियत वाले या उनसे जुड़े
लोगों, कुत्ते प्राध्यापकों को इन पर
आसीन किया गया पर फ़िर  भी रचा नहीं जा सका
ठीक ठाक वो साहित्य जो
कुत्ता समाज का दर्पण बनें .
मित्रों  इन दिनों मुझे कुत्तों के
साहित्य की बहुत चिंता है
और मै गहरी प्रतिबद्धता से कुत्तों
के साहित्य और अनुशीलन पर काम करना चाहता हूँ.

श्वान ३ 

कुत्तों में कविता को लेकर
खास किस्म  की आसक्ति होती है
यह बात मुझे कुत्ता कविता में
प्रतिमान और रहस्यवाद का तुलनात्मक
अध्ययन और अनुशीलन जैसे विषय पर
पी एच डी करने वाले कुत्ते ने बताया था
कुत्तों में कविता के प्रति विशेष अनुराग
उनके घ्राण इंद्री और पूंछ की गोलाई से विशेष
प्रभावित होता है
यदि किसी कुत्ते में सूंघने की अकूत
क्षमता है- मसलन वो सूंघ सके कि
अमुक कुत्ता आगे जाकर कूकूर प्रशासनिक सेवा में
बड़ा कुत्ता भवन बना सकता है
तो पूंछ की गोलाई और लचीलापन एक
सहज रूप में विकसित हो जाता है
यदि कोई कुत्ता कवि यह समझ ले कि
अमुक कुत्ता कवि किसी कूकूर ग्रंथावली या
कूकूर मासिक का संपादक हो जाएगा तो
थूथन के साथ लार भी टपकने लगती है
और पूंछ तो मारे खुशी के बगैर भोंगली में बारह मास रखे
सीधी  हो जाती है
कुत्तों में कविता की  समझ को लेकर
समझाने के लिए आपको सिर्फ गहरी
तटस्थता का भाव लिए आना होगा
कुत्ता कविता के व्यापक फलक पर.

श्वान ४ 

कुत्तों ने साहित्यकी विभिन्न
विधाओं पर पुरस्कार आरम्भ किये
पांच बड़े एवं बूढ़े कुत्तों को नियुक्त किया
कि वे श्रेष्ठ कुत्ता कवि ढूंढेंगे
दो खजेले कुत्तों को श्रेष्ठ आलोचक
कुत्ते को पुरस्कृत करने के लिए तय किया
कूकूर अनुशासन सेवा से जुड़े एक कुत्ते ने
छीन लिया अधिकार कि वो  श्रेष्ठ
कहानीकार कुत्ते को खोजेगा और साल में
अपने ही विभाग के सौजन्य से सारे  देश के
कुत्तों को बुलाकर, हड्डियां परोसकर
उस कमसिन कहानीकार कुत्ते को सम्मानित करेगा
फ़िर भी रह गए कुछ  प्राचीन कुत्ते जो
थे तो अभी की सदी में जन्मे पर
श्रृंगार, लय, ताल के साथ गीत छंद
लिखते थे और अक्सर प्रशासनिक सेवा से जुड़े
कुत्तों के साथ ताल्लुकात रखते थे
इन्हें गाहे- बगाहे बनने वाली समितियों में
रख  दिया जाता था और बरसों तक
एक दूसरे को ये पुरस्कृत करते रहते थे
मित्रों कुत्तों के बीच पुरस्कार बांटने की
बन्दर बाँट बहुत अदभुत है
पर अच्छी बात यह है कि
अभी कुत्तों में
ज्ञानपीठ, पदमश्री या सरस्वती परस्कार आरम्भ नहीं हुए है
इसलिए पुरस्कारों की शुचिता और वैभव
कुत्तों की भाषा में सुरक्षित है .


Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...