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जीवन में यादो का बोझ मत रखना, जीवन बहुत मुश्किल हो जाता है गुजारना"

एक उदास सा जीवन गुजारते हुए और जीवन की आपाधापी में अपराध करने को मजबूर और तंगहाल सा लंबा वक्त बीत ही नहीं रहा, अपना नाम भी अपने होने को सार्थक ना करता हो, और दूसरों के दिए हुए अड़े-सड़े नाम जिनसे सिर्फ एक क्रूरता का ही एहसास होता हो, लगातार पीसते हुए बोझिल घटनाओं के बीच से यदि कही प्यार की एक बयार आती भी है तो सारे लोग दुश्मन हो जाते है दो पाटन के बीच में घिसटते हुए कही अंतिम छोर पर एक हल्की सी किरण दिखाई देती है कि चलो उस पार जीवन सुखद हो पर कहा हर बार अपने आप को समझाकर और नए इरादों के साथ जमाने की शर्तों पर और खुद को ठग सा महसूस करते हुए भी जीने का माद्दा  बना हुआ है पर इस प्यार के बीच दो पल तो जी ले सुकून से ............और आख़िरी में अपने ही किसी के द्वारा मौत को गले लगाने की बेबसी और फ़िर यह दर्शन की "जीवन में यादो का बोझ मत रखना, जीवन बहुत मुश्किल हो जाता है गुजारना................." बस यही कुछ कहानी है जन्नत 2 की, और यही जन्नत खोजने में हम सब लगे है जिसे कबीर कहता था दो पाटन के बीच में साबुत बचा ना कोई......................

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आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

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आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...