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(जिंदगी के प्रवचन - अपनो से दुखी होकर......)

एक बूझी हुई सी महिला, संसार के दुखो से घिरी हुई और संसार के संताप अपने सर रखकर रोज सोती है और फ़िर अल्लसुबह उठकर काम यहाँ इस बियाबान में एक घटिया से कमरे पर आ जाती है .सारा दिन चिढ चिढ और डाट-फटकार , बदतमीजी अपने मातहतो के साथ दुर्व्यवहार, रूपयों के प्रति आसक्ति, दूसरों को देखकर खीजना बस और फ़िर अपने गमो में किसी को शामिल ना कर पाना, ना ही बताने की कोई सदिच्छा.........कैसे चले रे ये जीवन.......बस चल रहा है.........छोड़ दो सब छोड़ दो, संसार त्याज्य है, सब नश्वर है, और मोह माया का तो कोई ठिकाना भी नहीं है......एक छोटे सी जगह पर बैठकर जीवन गवां रहे है नर नारी......अपनी गठरी बांधकर चले चलो..........बस यही सही समय है, चले जाओ, चले जाओ -दूर कही दूर ........वरना भुगतोगे बुरी तरह से भुगतोगे.......नौकरी, रूपया पैसा तभी ठीक है जब खुद भी जी पाओ और दूसरों के लिए भी सुख के नए रास्ते खोजो वरना तो सब अनुपयुक्त है.........भुगतोगे .सोच लों.........सोच लों.......

(जिंदगी के प्रवचन - अपनो से दुखी होकर......)

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हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

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आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...