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Showing posts from December, 2025

Khari Khari, Drisht Kavi and Man Ko Chiththi - Posts from 21 to 31 Dec 2-25

साल भर की सीख १ अतीत को भूल जाओ, हम सबके अतीत में कीचड़ के सिवा कुछ नहीं, वो जो बड़े है - वो कीचड़ से सने है और जो छोटे है - कीचड़ से अटे है, बेहतर है अतीत का ना गुणगान सुनो, ना कहो और ना ही याद रखो २ जीवन एक ही है, पण्डो पुजारियों, मौलवियों, फादर्स और गुरुओं ने पिछले और अगले जन्म की बात की है, स्वर्ग - नर्क की कपोल कल्पना को थोपा है ,सब भूलकर जिंदगी का आज जियो और अभी, बाकी जीवन अनिश्चित है ३ जिंदगी में असफल होने, बदनाम होने, अकर्मण्य होने या अकेले होने से मत डरो, यह सब वे ही भोग सकते है - जो अलग है और बेहतर है, सबके समान होने में कोई नयापन नहीं है, अलग होना ही और भीड़ से अलग रहना ही चुनौती है और अक्सर बहादुर लोग ही इस गली में आते है ४ असफल होने का अर्थ जीवन में सब कुछ खत्म हो जाना नहीं है, आपकी असफलता ही दूसरों की सफलता है, सबसे नीचे वाली सीढ़ी ना हो तो शिखर एक झटके ढह जाएगा, नींव मजबूत ना हो तो कोई भी कलश शिखर पर स्थापित नहीं हो सकेगा, असफल लोग ही सफलता को स्थापित करके नए सोपान बनाते है ५ अपने आप पर विश्वास रखें - भले ही आप सबके साथ अपनी नज़र में भी एक समय के बाद किसी मोड़ पर गलत साब...

1/4 सदी - Post of 31 Dec 2025

  1/4 सदी सिक्कों की खनक कम हो रही है, सूरज की किरणों की चमक कम हो रही है, चट्टानों के दाग़ भी फ़ीके पड़ते नज़र आ रहे है, नदियों में उद्दाम वेग से बहता पानी रूक गया है, जंगलों की पगडंडी खो गई है - किसी सूने रास्ते पर, पहाड़ों के पीछे से झांकता सूरज उदास है कि सांझ की शफक पर अंधेरों के साये है बेतरतीब से और मद्धम सी लौ के साथ टिमटिमाते तारों में सुकून दिखता नहीं सदी के एक चौथाई समय का बोझ उठाए घड़ी की सुईयां बेचैन है, वे थक गई है पेंडुलम की निर्बाध गति से और अब बहुत शिद्दत से किसी कंजी लगी पुरानी दीवार से वाबस्ता होकर थम जाना चाहती है, पेंडुलम छुप जाना चाहता है उन कवेलुओं के बीच - जहां से बरसात में नेह की बूंदें टप-टप टपकती है और पूरे कच्चे घर को सौंधी खुशबू से भर देती है कितना मुश्किल है दो सदियों के बीच रहना - एक जिसके छठे दशक के अंत तक आते-आते जन्में, मुक्ति के स्वप्न देखते और आज़ादी की हवा में सांस लेकर विचरते लोग-जिनके पास उनींदें से चमकीले स्वप्न थे, मेहनतकश हाथ, कुछ भले से उजियारे और होठों पर उमंगों के गीत- जिनसे वे प्रतिफल या अनुतोष नहीं, बल्कि अपनी संततियो के लिए एक सुखद भविष...

Man Ko Chithti, Karmveer Khandwa, and other Posts from 14 to 20 Dec 2025

भोत दिनों से बाहेर चल रिया हूँ, तबियत भी ठीक नी चल रई थी, कजने कैसा लग रिया था, जी घबरा रिया था फेर समझ आया कि गड़बड़ कहां हो रई हेगी एक गुमटी से गर्मागर्म ताजी बन रही दस रुपए की मालवी झन्नाट सेव लेकर तीन - चार फ़क्की में खत्म की, ढेका पे हाथ पोछे और हेडपंप से पानी पिया चुल्लू भर के तब जाकर जान में जान आई, और अब अच्छा लग रिया हेगा, भाड़ में जाए डॉक्टर और दवाई, हम मालवा वालों को सेव मिल जाए, बस हो गया है नी #मालवी_सेव *** बहुत पुरानी स्मृतियां कभी यूं कौंधती है कि मन विचलित हो जाता है और लगता है कि आ अब लौट चलें किसी बैठक में किसी पराए शहर में कही तसल्ली से बैठकर देस को याद करते हुए और अपने दिनों को याद कर सेव परमल खाते हुए मालवा के चार लोग - जो अब अमेरिका वासी हो गए है स्मृतियां जोड़ती है, भावनात्मक रूप से तोड़ती है, तस्वीरों पर प्रतिबंध नहीं मन की गांठों पर प्रतिबंध लगना चाहिए़ #मन_को_चिठ्ठी *** पिछले दिनों कर्मवीर, माखनलाल पत्रकारिता विवि के खंडवा परिसर जाना हुआ, वहां के निदेशक मनोज भाई, आसिफ भाई, चौरे जी के साथ अन्य साथियों से मुलाकात हुई, साथ ही उस दिन उपस्थित छात्रों से बातें हुई,...