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Khari Khari and Man Ko Chithti - Posts from 3 to 5 Oct 2025

जिंदगी को यदि आप खेल मान रहे है तो याद रखिए हर खेल किसी ना किसी के साथ मिलकर ही पूरा होता है, आपकी जीत, हार और जश्न या गम आदि में सिर्फ आप ही नहीं - वो सब शामिल है जो आपके आसपास है, जो आपसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए है - अपनी कमजोर चालों, हार और पांसे की गति या निर्णय के लिए सिर्फ दूसरों को दोष देने से काम नहीं चलेगा, वैसे यह भी याद रखिए कि आपमें वह अकूत क्षमता है कि आप एक लाख चालें चंद सेकेंड्स में चलकर अपना भरपूर फायदा भी उठा सकते है और अपना नुकसान भी कर सकते है
बस, जिंदगी को या तो खेल मानकर हर बिसात पर खेलते रहिए या फिर चुपचाप जो हो रहा - उसे नियति मानकर मोहरे बन जाईये, यह आपको तय करना है कि आप पांसा बनेंगे या मोहरा, पांसा बनने में जोखिम है, जीत की संभावनाएं कम है और मौके भी नगण्य है - जबकि मोहरे बनने में हमेशा आप आगे है, इस्तेमाल में है और लगातार हार - जीत के निर्णय में है, मैने तो पांसा बनना तय किया है - जो भी हो, पर किसी उजबक का मोहरा नहीं बनूंगा और बिसात पलटते रहूंगा - फिर भले एक मौका मिलें या न्यूनतम संभावना हो जीवन में
मैं मोहरा नहीं हूँ, सोते और जागते हुए यह हमेशा याद रखता हूँ - ताकि कोई मेरा इस्तेमाल ना कर सकें, इंसान हूँ - कोई टूल नहीं और जिन लोगों ने भी टूल बनाया उन्हें अब बख्शूँगा भी नहीं
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"चूहों के काटने से नहीं मरें तो सिरप पिलाकर बच्चों को मार डालेगी मप्र सरकार" - बच्चे मरते रहें और हमारी परोपकारी सरकार चार लाख मुआवजा देगी - टेंशन नॉट
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एम व्हाय, इंदौर में बच्चों को चूहे काटने से मौत का मामला थमा नहीं कि सिरप से लगभग दो दर्जन बच्चे मर गए, और मजेदार यह कि सिरप कांड में सरकार ने एक डाक्टर को खिलाफ FIR करवाई है - क्या मूर्खता है, सुबह न्यूज़ में सुना तो अजीब लगा इसमें डॉक्टर की क्या गलती है यदि अस्पताल अपनी खरीदी में यह स्वास्थ्य विभाग सेंट्रल लेवल पर यह सब खरीदी करता है और कमीशन बाजी का धंधा करता है तो डॉक्टर क्या करेगा, ऐसे में डॉक्टर के खिलाफ पुलिस रिपोर्ट करना सिवाय मूर्खता के कुछ नहीं है
जिला अस्पताल, देवास में मैं देखता हूं कि जो गोली मैं मांगता हूं - वह नहीं देते मतलब डाक्टर के लिखकर देने के बाद, जैसे Citagliptin - 50 mg, बल्कि वे कहते हैं कि हमारे पास तो यह नहीं है, और खरीदने की क्षमता भी नहीं और बजट भी नहीं और ना ही स्वीकृती है, पर यही गोली गुना, मंडला, शिवपुरी, झबुआ, बड़वानी में मिल जाती है, इंसुलिन के वायल देते है - पर कार्टिलेज देने में परहेज करते है, जबकि दूसरी जगहों पर मिल जाते है, यदि आप ड्यूटी डाक्टर को अपनी समस्या बताएंगे तो कहता है स्पेशलिस्ट के पास जाओ मेरे को समय नहीं है, लैब में इतनी भीड़ है कि कहा नहीं जा सकता
मध्य प्रदेश शासन का स्वास्थ्य विभाग पहले अपने गिरेबान में झांके, उसके बाद कुछ काम करें , सिरप के संदर्भ में तो एक मामला निकला है, Cardiac Angina, CRF, Fatty Liver, AIDs, कैंसर या अन्य गंभीर बीमारियों में हजारों ऐसे मामले हैं जिनमें मोटा तगड़ा कमीशन लिया जाता है और किसी को पता भी नहीं चलता, हजारों मरीज साइलेंट मौत को प्राप्त हो रहे हैं - हार्ट अटैक को ही ले लीजिए कोविड के घपले से अभी तक कोई निकल नहीं पाया है और ना सरकार कोई जवाब दे रही है, सुप्रीम कोर्ट में तुषार मेहता ने अजीब जवाब देकर सारी बहस खत्म कर दी थी
डिलीवरी या गायनी के केस में तो पुरुषों को वार्ड में या महिला डाक्टर से बात करना भी एक तरह से मना है, और अस्पतालों में अधिकतर गरीब और मजबूर महिलाएं डिलीवरी के लिए आती है वहां भी गुल खिलते होंगे पर किसी को मालूम पड़ जाए मजाल है, सीजर करवाकर मरीज से रूपये ऐंठना आम बात है ही सबको मालूम है
ऐसे में अपने तंत्र सुधारने के बजाय डाक्टरों को निशाना बनाना कहां तक उचित है, दीनदयाल निशुल्क औषधि वितरण केंद्र पर संभवत: 45 दवाइयां है जो वितरित की जाती है, फिर आपको कुछ भी हो ऐसे में इस सिरप का चयन किसने और किसके दबाव में किया या बाकी दवाओं के चयन, क्रय समिति, आदि के निर्णय कौन और कैसे लेता है, जिला कलेक्टर के पास शिकायत करो तो CMHO या सिविल सर्जन किसी पुराने आदेश का हवाला देकर कह देते है कि यह राज्य की नीति का हिस्सा है अपने को यानी जिला स्वास्थ्य समिति को फ्री हैंड नहीं है
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अब थोड़ी बात डॉक्टर्स गैंग और स्वास्थ्य के NHM के बारे में
NHM का जिला और ब्लॉक स्तर का स्टाफ जो संविदा पर था तो अब स्थाई हो गया है और ये लोग सिवाय डाटा इंट्री और फर्जीवाड़े के कुछ नहीं करते DPM, BPM से लेकर बाकी सभी अपने लाइन मैनेजर की चापलूसी और चम्मचगिरी में लगे रहते है और सेटिंग में लगे रहते है, ग्रामीण क्षेत्रों में बुरे हाल है, आशा के पास दवाइयां खुट गई है पर उसे दवाई रिप्लेसमेंट में भी मिल रहा, CHC, PHC , Urban PHC की ना मूल्यांकन हो रहा - ना मॉनिटरिंग
मप्र में स्वास्थ्य सुविधाएं घोर लापरवाही की हद तक पहुंच चुकी है, 108 से लेकर बाकी जन सुविधाएं नेताओं के कब्जे में है, विधायक सांसदों की गाड़ियां है इन्हीं के लोग आउट सोर्स पर है और छुटपुट खरीदी में यही लोग शामिल है ऐसे में NHM का जो सफेद हाथी जैसा भवन और वहां काम करने वाले गिरगिट है उनपर कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए, वर्षों से एक स्थान कर जमे निकम्मे डॉक्टर्स को भी स्थानांतरित करना चाहिए, देवास में एक महिला विशेषज्ञ जो Ophthalmologist है , कभी दोपहर 1130 - 1200 के पहले नहीं आती - जिसको जो करना हो कर लें, दस से ज्यादा वर्ष तो मुझे हो गए देखते हुए इसे
प्रदेश के मुखिया को उज्जैन में जमीन खरीदने से फुर्सत नहीं, पूरा मंत्रिमंडल सिंहस्थ के बहाने धर्म कर्म में लगा है कि लोगों को मोक्ष दिलवाएंगे और बच्चों से शुरूवात कर दी है, स्वास्थ्य मंत्री को देवास अस्पताल में आते नहीं देखा आज तक कभी, गत बीस वर्षों में क्या होगा इस प्रदेश का, भाजपा के निकम्मे शासन ने गत बीस वर्षों में बंटाधार कर दिया पूरे तंत्र का

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