Skip to main content

Biggest and smallest spellings of Railway station, Kuchh Rang Pyar ke - posts of 2 Oct 2022

बड़ा सा शानदार, खादी का झब्बा पहनकर और झकास वाला डिओ छिड़ककर 14 लाख की गाड़ी बब्बा ने बंगले के बाहर निकाली और सरसरी निगाह से आज की दिनचर्या पर नजर डाली, रेबैन के चश्मे को केस से निकालकर पहना और रेडियो मिर्ची ऑन किया जिसमें भजन आ रहा था - वैष्णव जण तो तैने कहिये ....
कुल बारह जगह भाषण देना थे आज, नाश्ता गांधी आश्रम में, लंच फाइव स्टार में था और डिनर शहर के बाहर वाले वीआईपी रिसोर्ट में और आज कुल मिलाकर 15 प्रतीक चिन्ह मिलेंगे, 12 शॉल्स, 12 श्रीफल, डेढ़ लाख की नगदी पारिश्रमिक के रूप में, चार किताब लिखने के अनुबंध, तीन फील्ड ट्रिप का प्लान है आगामी माह में - जिसमे एक मालदीव का भी शामिल है - बीबी और बेटी भी शामिल होगी, यह मनवा लिया था उस रोटरी क्लब से
गाड़ी मंडी की ओर से घुमाई - "साला, ये गांधी आश्रम भी अब और बड़ा करना पड़ेगा, वर्धा टाईप जमीन कबाड़ना पड़ेगी, ये नया कलेक्टर कुछ ले देकर मान जाए तो ले लेते है इस साल, मेरे कार्यकाल की उपलब्धि भी रहेगी और कोने में बेटी का दफ़्तर भी बनवा दूँगा - कब तक किराए की बिल्डिंग में परेशान होगी, बब्बा सोच ही रहे थे कि अचानक एक बैलगाड़ी सामने आ गई - अबै तेरी माँ का... बोलते हुए बब्बा नीचे उतरे और गाड़ीवान का गला पकड़ लिया - "साले हरामखोर, तुम लोग आज भी मंडी में बेचने आ गए, कितने भूखे हो तुम किसान लोग, और तेरी गाड़ी साइड से लगा, मेरी गाड़ी में खरोच भी आ गई तो तेरी.. कर दूँगा..."
थोड़ा आगे बढ़े तो एक सब्जी बेचने वाली सामने आ गई, "बच गई साली अभी नीचे आ जाती तो फालतू का पंगा हो जाता साला सुबू सुबू" - उससे निपटकर जैसे - तैसे गांधी भवन पहुँचे तो वहाँ मुख्य द्वार पर ही बकरियां लेण्डी कर रही थी, गौ माता का ढेर गोबर पड़ा था, मख्खियां भिनभिना रही थी - गुस्से में पागल हुए बब्बा ने रामधारी को आवाज़ दी और कहा- 'कमीनों मुफ्त की रोटी खाते हो, सफाई नही होती तुमसे, ये गोबर तुम्हारा बाप उठाएगा...आज जनता आएगी, कम से कम गाय ढोरों को तो आश्रम से दूर रखो" फिर मुनिया को बुलाया एक सौ का नोट निकाला और बोले "जा मुनिया, रिलायंस फ्रेश से अमूल का डेढ़ लीटर दूध ले आ, चाय मस्त बननी चाहिये"
शांत चित्त से आश्रम में अंदर घुसे तो डायरी उठाई और पहले व्याख्यान का विषय देखा - जिसपर उन्हें बोलना था -
"वर्तमान समय में हिंसा, द्वैष और भाषा की शुचिता - किसान, महिला, आम आदमी और छात्रों के सन्दर्भ में"
◆◆◆
गांधी और शास्त्री जयंती की शुभकामनाएं
मजबूती का नाम ही गांधी है - यह भी याद रहें
***
देश के सबसे बड़े नाम वाले रेलवे स्टेशन नाम Venkatanarasimharajuvaripeta है, इसकी स्पेलिंग में कुल 28 अंग्रेजी अक्षर हैं - यह स्टेशन आंध्र प्रदेश में मौजूद है, जो कि तमिलनाडु बॉर्डर के काफी करीब है और सबसे छोटे स्टेशन का नाम Ib है जो उड़ीसा में है
***

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

अदम गोंडवी की ग़ज़लें

अदम गोंडवी की ग़ज़लें............हिन्दुस्तान ने एक शायर ही नहीं खोया बल्कि एक मुकम्मिल इंसान खो दिया है जो लोगो से लोगो की बात कराता था.............और बस इसी तरह से लड़ते भिडते और मौत से भी जीत गया वो........किसी से मदद की गुहार नहीं लगाई और किसी का मोहताज भी नहीं रहा धन्य है ऐसे अदम गोंडवी और धन्य है उनकी धारदार लेखनी.........नमन......... काजू भुने प्लेट में, व्हिस्की गिलास मे उतरा है रामराज विधायक निवास में पक्के समाजवादी हैं, तस्कर हों या डकैत इतना असर है ख़ादी के उजले लिबास में आजादी का वो जश्न मनायें तो किस तरह जो आ गए फुटपाथ पर घर की तलाश में पैसे से आप चाहें तो सरकार गिरा दें संसद बदल गयी है यहाँ की नख़ास में जनता के पास एक ही चारा है बगावत यह बात कह रहा हूँ मैं होशो-हवास में 000 मुक्तिकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की यह समझदारों की दुनिया है विरोधाभास की आप कहते हैं इसे जिस देश का स्वर्णिम अतीत वो कहानी है महज़ प्रतिरोध की, संत्रास की यक्ष प्रश्नों में उलझ कर रह गई बूढ़ी सदी ये परीक्षा की घड़ी है क्या हमारे व्यास की? इस व्यवस्था ने नई पीढ़ी को आखिर क्या दिया सेक्स की रंगीनियाँ या ...

Rest in Peace Dr BK Pasi, You will be Remembered Always

नमन डा बी के पासी सन 1991-92 का साल था , एम ए अंग्रेज़ी में करने के बाद कुछ और पढ़ा जाए इस बात की इच्छा थी लिहाजा सोचा कि पीएच डी करने में तो समय लगेगा क्यों ना एम फिल कर लिया जाए, इंदौर के देवी अहिल्या विवि में थोड़ा परिचय था, स्याग भाई ( डा रामनारायण स्याग ) ने ताजा ताजा शोध पूरा किया था और शिक्षा विभाग में अक्सर आना जाना होता था, देवास की मीना बुद्धिसागर उन दिनों वहा शोध के लिए पंजीकृत हुई ही थी, डा उमेश वशिष्ठ, डा सुशील त्यागी, डा छाया गोयल और डा देवराज गोयल से परिचय था ही, सो सोचा कि क्यों ना यहाँ कुछ पढाई की संभावनाएं टटोली जाएँ. सीधा जाकर डा बी के पासी से मिला तो उन्होंने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा क्या करेगा अब पढ़कर और इतना अच्छा काम कर रहा है तो अब क्या करना है फिर मैंने जिद की तो उन्होंने कहा कि थोड़ा ठहर जा मै एक नया पाठ्यक्रम शुरू कर रहा हूँ भविष्य अध्ययन मान्यता के लिए प्रकरण यु जी सी गया है आते ही सूचना करूंगा. बात आई गयी हो गयी, एक दिन बैतूल में गया हुआ था एक शिक्षक प्रशिक्षण में था तो डा पासी का फोन घर पहुंचा और कहा कि तुरंत मिलने को बुलाया है. मै आते ही ...