Skip to main content

Happy Marriage Party of Kushal and Gunjan 13 June 15




और लम्बी थकान, खंडवा यात्रा और बरसते मौसम, खुशनुमा काव्य संध्या का समापन हुआ हमारे युवा मित्र साथी Kushal Shrivas की शादी की खुशनुमा पार्टी से . मैंने कहा भाई मालवे में कहते है कि जो बन्दा या बंदी अपनी शादी में काम करता है उसके ब्याह में पानी गिरता है तेजी से तो काम क्यों किया हम लोग काहे थे यहाँ बुलवा लेते, बोला अचानक सब तय हुआ और हो गयी शादी. बहरहाल, गूंजन से मिलकर भी अच्छा लगा. बहुत सारी शुभकामनाएं और दुआएं..........कुशल और गूंजन के लिए.
सुबह से फील्ड में था, दोपहर खंडवा आया, सामान पैक किया, बस में लम्बी यात्रा, थकान, फिर आते ही कुमार जी के घर काव्य गोष्ठी, फिर कुशल की पार्टी और आकर सब कुछ दर्ज करना ताकि सनद रहें............सच में लगता है कि अभी बहुत दम है और इंसान चाहे तो सब कर सकता है और सहेज सकता है बशर्ते योजना हो, और समय की प्रतिबद्धता..........बस बाकी तो सब हो जाता है.



"व्यस्त समय और ढेर सारे काम"


कल से ग्वालियर 18 तक, फिर "उजास - हमारे समय में कविता" इलाहाबाद में कविता पाठ हेतु तीन दिन, फिर 23 से 30 तक शिवपुरी.........फिर पन्ना, बालाघाट और झाबुआ फिर रायपुर, दुर्ग और ना जाने कहाँ कहाँ...........सामान सौ बरस का और पल की खबर नहीं की तर्ज पर टिकिट दो महीने के और तन की खबर नहीं..........खैर अभी तो चलेगा यह शरीर.........नौकरी ना करके अच्छा हो रहा है, रोज का दिन एक उत्सव की तरह से बीतता है दोस्तों के साथ, अपनी पसंद के काम के साथ और दुनिया को नापते हुए कि चलते चलते कुछ सीख लूं पता नहीं कल हो ना हो..............!!!! लगता है कि इस जीवन में दुनिया  को नापते और गली कूचों से गुजरते हुए एक उम्र बीत जा ही रही है बस धीरे धीरे एक अनंतिम यात्रा की तैयारी हो रही है...........

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...