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जो तटस्थ है समय लिखेगा उनका भी इतिहास..............

बड़ा अजीब तंत्र है छोटे सरपंचों के जिनके पास खाने का एक दाना नहीं था आज मेरे दफ्तर में वो बोलेरो, स्कोर्पियो लेकर आते है, जिले के छोटे कर्मचारी जिन्हें तृतीय श्रेणी कहा जाता है जो सायकिलो पर घूमते थे वे आज वेगन आर या अल्टो में घूम रहे है, ब्लाक स्तर के अधिकारी बड़ी बड़ी गाडियों में घूम रहे है, कलेक्टर रेट पर काम करने वाले कर्मचारी भोपाल से रोज कार से आते है और जाते है, अपने कार्यालय के साथी की बहन बेटियों की शादी में कर्मचारी वाशिंग मशीन से लेकर लेप टॉप तक गिफ्ट देते है .............वो भी पचास हजार की रेंज में, मेरे दफ्तर के चपरासी हर छः माह में नई डिजाइन की मोटर बाईक खरीद लेते है, पता नहीं सब इमानदारी से काम करते है तो रूपयों का पेड़ इनके घर लगा है क्या या ये कुछ विशेष हूनर वाले है ? मुझे तो ट्रक पर लिखा शेर याद आता है "दूसरे को देखकर परेशान क्यों होता है / खुदा तुझे भी देगा हैरान क्यों होता है"

विनाश काले विपरीत बुद्धि जैसी कहावते अपना दम तोड़ रही है और फ़िर इस संक्रमण काल में लोग कहते है कि यही तो तरक्की है थोड़े से पासिटीव हो जाओ ...........क्या करू उम्र का झटका है या समझ का फेर या सच में मतिभ्रम ..................

जो तटस्थ है समय लिखेगा उनका भी इतिहास..............

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आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

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