जब उसने कहा कि में तुमसे नफ़रत करता हूँ तो लगा कि चलो गुबार निकल गया अब वो इन यादो के सहारे तो ज़िंदा नहीं रहेगा बस मरते समय उसे लगेगा कि वो मुक्त हो गया सबसे और फ़िर एक दमकता हुआ निस्तेज चेहरा मानो जिंदगी जीतने की खुशी में वो सब कुछ हारकर भी जीत गया और बस यही वो क्षण था जब उसे लगा कि क्षमा बडन को चाहिए गलत नहीं था, मौत तो जीवन की सर्वोच्च अवस्था है जब हम नफ़रत को स्नेह में बदल देते है(फेसबुक मेनिया)
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