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भारत भवन में लगी एक कविता जो मोहित के लिए है........


भारत भवन में लगी एक कविता जिसने मुझे बहुत कुछ सीखा दिया, ज़िन्दगी के प्रति भी और समाज के प्रति भी। कल जयपुर से विवेक आया था- दो दिन साथ रहा मेरे , बस यूही घूमते रहे और ये कविता हाथ लग गई तो ले आया अपने मोहि के लिए.....................
यह कविता मोहित के लिए है।

Comments

Unknown said…
sir really its a very inspiring poem, esp 1st and 3rd para.I dont know how Mohit has reacted on these quotes, but, i m sure these lines will make me motivated n energetic....may be hamesha...
Tota said…
liked it very much..but u know what i want on this b'day..have u written it??
Tota said…
i liked it..thanks..have u written my gift??

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