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Showing posts from March, 2026

Man Ko Chithti, Drisht Kavi and Khari Khari - Posts from 26 Feb to 8 March 2026

"अचानक मुझमें असंभव के लिए आकांक्षा जागी,  अपना यह संसार काफी असहनीय है, इसलिए मुझे चंद्रमा, या खुशी चाहिए—कुछ ऐसा, जो वस्तुतः पागलपन-सा जान पड़े, मैं असंभव का संधान कर रहा हूँ... देखो, तर्क कहाँ ले जाता है—शक्ति अपनी सर्वोच्च सीमा तक, इच्छाशक्ति अपने अंतर छोर तक! शक्ति तब तक संपूर्ण नहीं होती, जब तक अपनी काली नियति के सामने आत्मसमर्पण न कर दिया जाये। नहीं, अब वापसी नहीं हो सकती, मुझे आगे बढ़ते ही जाना है..."  • कालीगुला "मुझे चांद चहिये" - सुरेंद्र वर्मा के उपन्यास से __________ प्रिय हर्ष, तुम्हें लिखना वैसा ही है जैसे किसी बंद खिड़की से आकाश को पुकारना, तुम चले गए हो, पर तुम्हारी चुप्पी अब भी शब्दों से अधिक बोलती है, तुम्हारे भीतर जो प्रेम था, वह साधारण नहीं था—वह ज्वार की तरह उठता था, पूर्णिमा के चाँद की तरह फैलता था, और उसी चाँद की तरह शायद तुम्हें दूर, बहुत दूर ले भी गया वर्षा वशिष्ठ तुम्हारे लिए केवल एक स्त्री नहीं थी, वह तुम्हारा स्वप्न थी, तुम्हारी आकांक्षा, तुम्हारा आत्मविश्वास और तुम्हारी असुरक्षा—सब कुछ, तुमने प्रेम को पूजा की तरह जिया, और जब वह तुम्हारे...