Skip to main content

No Confidence Motion in Parliament 10 Aug 2023 Random Posts of 10 Aug 23

जब नाश मनुज पर छाता है तो
विवेक सबसे पहले मर जाता है

इंग्लैंड का प्रधानमंत्री सच में अब मानसिक रोगी है - साबित हो गया आज इसे लेबर पार्टी के नेता के अलावा कुछ नही दिख रहा, यह उसके हाउस में पुनः आने से, पैदल यात्रा से घबरा गया है और चुनाव हाथ से जाते देख पगला गया है
आज भले ही "वोट ऑफ कॉन्फिडेंस" जीत जाए पर ये चुनाव तक एकदम अपराध बोध में फ्रस्ट्रेट होकर हिंसक हो जायेगा और फिर मौत से खेलेगा
पढ़े लिखें मूर्ख गोरे लोगों देख लो किन बेरोजगारों गंवारों और मूर्ख लोगो को सत्ता सौंप दी तुमने
शर्म करो डूब मरो गोरे लोगों तुम्हारे साम्राज्य का सूरज अंधेरे के हाथ में है आज तुम्हारे लीडर की असलियत सामने आ ही गई

अबै मणिपुर पर बोल फालतू समय क्यों बर्बाद कर रहा है
यही आदत है दक्षिण पंथियों की कि मुद्दे के अलावा सब तरह की बकवास कर लेते है और यह इसमें अग्रणी है सन 2014 से यही कर रहा है
इसलिये तो नौटँकीबाज कहता हूँ
अबै तू भी तो मौज मस्ती कर रहा है 14 से अभी तक, मशरूम खा रहा है और अरबों रुपये कपड़ों पर बर्बाद कर दिये हमारे टैक्स के
मणिशंकर अय्यर ज़िंदाबाद

एक प्रधानमंत्री वो था - जिसने भारत एक खोज से लेकर तमाम किताबें लिखी, एक वो थी जो कट्टर देशप्रेमी और पांच सूत्री कार्यक्रम बनाकर सच में गरीबी हटाना चाहती थी, एक वो था जो दुनिया का सबसे बड़ा अर्थशास्त्री था, एक वो था जो विजनरी था - टेक्नोक्रेट था, और एक यह है जो ना भाषा समझता है और ना शिष्टता, निहायत अनपढ़ और सड़कछाप टाइप भाषा बोलकर संसदीय गरिमा का अपमान कर रहा है , दिक्कत इस व्यक्ति से नही प्रधानमंत्री पद की गरिमा से है जो कलुषित हो गई है लगातार और मज़ेदार यह है कि पूरे सांसद जो पढ़े लिखें डॉक्टर, वकील, जज, प्रशासक, नौकरशाह, बुद्धिजीवी और पत्रकार थे वे भी भेड़चाल में जाकर अक्ल बेचकर गैंग में शामिल हो गए
बेहद शर्मनाक
अच्छा है इस देश के लोग इससे भी बुरा समय और व्यक्ति डिजर्व करते है, पाकिस्तान का हश्र देख ही रहें हैं हम

56 इंच का सीना हो तो LIC का शेयर जो 1100 में खरीदा था उसकी मूल कीमत ही दिलवा दें फर्जी, अभी 600 में बेचा
सत्यनाश कर दिया अनपढ़ ने और बकवास करके कह रहा कि LIC grow कर रही है, निर्मला बाई से पूछ लें रे नादान तेरे पीछे बैठी है
संसद में ऑन रिकॉर्ड झूठ बोलने वाला अभद्र प्रधानमंत्री - इसकी भाषा ही देख लो

हमारे यहाँ कहते है
ठिलवा

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...