Skip to main content

Sandip Ki Rasoi, GuruPournima Posts of 13 July 2022

लो बरसात का उदघाटन और स्वागत कर रियाँ हूँ, आज निगम के चुनाव है हमारे यहाँ सो भोट डालने कूँ भुट्टे के गर्मागर्म पकौड़े कटहल के ताजें अचार के साथ ख़ाकर जा रियाँ हूँ
जे खाने के पेले का फोटू हेगा, मल्लब ये कि खत्म हो गए हेंगे - बोलना, जिसको भी खाना है एडभान्स में बता दें

बनाने की विधि -
◆ नरम भुट्टों [अमेरिकन कॉर्न हो तो बेहतर] को कीस कर रख ले, मिक्सी में दानों को पीसे नही वरना स्वाद खत्म हो जायेगा
◆ फिर उसमें थोड़ा सा बेसन और थोड़ा सा मैदा मिलाकर दो चम्मच ताज़ा फेंटा हुआ दही मिलाएं और आधा घंटा रख दे
◆ तलने के समय मिश्रण में स्वादानुसार नमक, लाल मिर्ची, हल्दी, गरम मसाला, धनिया पाउडर, काली मिर्ची का पाउडर, अमचूर पाउडर, कटी हरी मिर्च, प्याज़, ताज़ा धनिया, थोड़ा सा मोयन और थोड़ा सा मीठा सोडा मिलाकर अच्छे से हिला लें
◆ इस मिश्रण को 10 मिनट रखें और बाद में छोटे छोटे पकौड़ों के आकार में गर्मागर्म तेल में तलें
◆ परोसते समय पकौड़ों पर चाट मसाला डालकर ताजे कटहल या आम के अचार के साथ खायें और दोपहर के भोजन की छुट्टी रखें
◆ शाम को खिचड़ी या दलिया खायें - पापड़ दही के साथ, जे हो गई आपकी 1600 या 1800 किलो कैलोरी की डाइट
😂😂😂😂
***
शिक्षक और गुरू के अंतर को जिसने समझा दिया और जीवन को द्वंद्वों, ऊहापोहों, तनाव और प्रश्नों से भर दिया और सीखाया कि जटिलताओं के बीच से ही रास्ता निकलेगा - वही असली गुरू है
टेढ़े रास्तों पर डालकर कहा - जाओ, अपने रास्ते ढूँढो और उनपर पदचिन्ह दो - भले आँधियाँ मिटा दें और वक्त की धूल तहस - नहस कर दें उन सबको - वही गुरू
सात सुरों के आगे का सफर तुम्हें ही तय करना है, आरोह - अवरोहों को सम्हालते हुए और यह भी कि अब रियाज़ काम ना आयेगा - बस पंचम लगाओ और तान छेड़ो - वही गुरू
शब्दों से नाता जोड़कर एक पूरी कोरी कॉपी थमा दी कि - जाओ शब्द साधक बनो, ना व्याकरण दी और ना वर्तनी, बस अक्षर का ज्ञान करवा कर क्षरण के नुकसान बताते हुए हाथ में स्याही कलम देकर छोड़ दिया - वही गुरू
जीवन के प्रसन्नतम क्षणों में आगाह किया बारम्बार कि यह सब नश्वर है, गहनतम सच सिर्फ मौत है - उसकी तैयारी करो, जीवन की अंतिम यात्रा ही सफ़लता का सर्वोच्च सर्ग है इसके स्वागत हेतु आतुर रहो, मोहपाश में पड़े बिना विरक्ति रखो और निस्पृह बने रहो - वही गुरू
यदि यह सब आपने पा लिया और अपने अंतस में झाँकने का, स्वीकारने का हौसला है - तो सारी वासनाएँ, ऐषणा और सांसारिक बातें व्यर्थ है और यह सब भीतर ही खोजना होगा, दुनिया का कोई गुरू ना यह सीखा सकता है और ना कोई शिष्य यह गूढ़तम रहस्य सीख सकता है
हर क्षण खुद से ही जूझना है, अपने अस्तित्व को पहचानकर ही हर कदम पर आगे बढ़ना है, अपने भीतर का अक्स ही असली गुरू है - जो हरदम आपको ललकारता है, सीखाता है, प्रेरित करता है, डपटते हुए आगे करता है और एक दिन इसी देह को त्यागकर किसी अनजान प्रदेश में ले जाने को तैयार करता है - ऐसे गुरू को प्रणाम कर आगे बढ़े
सबको गुरूपौर्णिमा की
बधाई

Comments

Popular posts from this blog

हमें सत्य के शिवालो की और ले चलो

आभा निवसरकर "एक गीत ढूंढ रही हूं... किसी के पास हो तो बताएं.. अज्ञान के अंधेरों से हमें ज्ञान के उजालों की ओर ले चलो... असत्य की दीवारों से हमें सत्य के शिवालों की ओर ले चलो.....हम की मर्यादा न तोड़े एक सीमा में रहें ना करें अन्याय औरों पर न औरों का सहें नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." मैंने भी ये गीत चित्रकूट विवि से बी एड करते समय मेरी सहपाठिन जो छिंदवाडा से थी के मुह से सुना था मुझे सिर्फ यही पंक्तिया याद है " नफरतों के जहर से प्रेम के प्यालों की ओर ले चलो...." बस बहुत सालो से खोज जारी है वो सहपाठिन शिशु मंदिर में पढाती थी शायद किसी दीदी या अचार जी को याद हो........? अगर मिले तो यहाँ जरूर पोस्ट करना अदभुत स्वर थे और शब्द तो बहुत ही सुन्दर थे..... "सब दुखो के जहर का एक ही इलाज है या तो ये अज्ञानता अपनी या तो ये अभिमान है....नफरतो के जहर से प्रेम के प्यालो की और ले चलो........"ये भी याद आया कमाल है मेरी हार्ड डिस्क बही भी काम कर रही है ........आज सन १९९१-९२ की बातें याद आ गयी बरबस और सतना की यादें और मेरी एक कहानी "सत...

हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ

एक जंगल था। उसमें में हर तरह के जानवर रहते थे। एक दिन जंगल के राजा का चुनाव हुआ। जानवरों ने शेर को छोड़कर एक बन्दर को राजा बना दिया। एक दिन शेर बकरी के बच्चे को उठा के ले गया। बकरी बन्दर राजा के पास गई और अपने बच्चे को छुड़ाने की मदद मांगी।बन्दर शेर की गुफा के पास गया और गुफा में बच्चे को देखा, पर अन्दर जाने की हिम्मत नहीं हुई। बन्दर राजा गुफा के पेड़ो पर उछाल लगाता रहा.. कई दिन ऐसे ही उछाल कूद में गुजर गए। तब एक दिन बकरी ने जाके पूछा .." राजा जी मेरा बच्चा कब लाओगे.. ?" इस बन्दर राजा तिलमिलाते हुए बोले "-: .. . . . हमारी भागदौड़ में कोई कमी हो तो बताओ "

आशिक की है बारात - जरा झूमके निकले. 27 April 2017

भौंडी आवाज में गरीब बैंड वालों को गवाने वालों, ढोल और ताशों से दूसरों का चैन छिनने वालों, सड़कों पर घटिया नाच कर ट्रैफिक जाम करने वालों - जाओ तुम्हे श्राप देता हूँ कि तुम्हारे वैवाहिक जीवन मे इससे ज्यादा कलह और शोर हो, तुम्हारी जीवन गाड़ी हमेंशा किसी ट्रैफिक में दबकर सिसकती रहें और तुम अपनी घरवाली के ढोल ताशों पर ताउम्र नाचते रहो और कोई एक चवन्नी भी ना लुटाएं, तुम्हारे जीवन मे बिजली ना आये और ऐसा अंधेरा छा जाएं कि तुम एक जुगनू के लिए तरस जाओ। शादी कर रहे हो तो क्या किसी के बाप  पर एहसान कर रहे हो - साला रात रात भर पुट्ठे हिलाकर नाचते हो और दूसरों की नींद हराम करते हो, बारात में घण्टों सड़कों पर मटकते रहते हो, तुम्हारी शादी क्या इतिहास में पहली बार हो रही ? साला अपना जीवन तो नर्क बनाओगे ही शादी के बाद - उसके मातम में हम सबको क्यों लपेटे में लेते हो ? और प्रशासन , पुलिस खींसे निपोरकर नाचते लौंडों और पसीने में नहाती औरतों को घूरकर मजे से देखती रहती है कि कही कुछ दिख जाए, सड़क पर और छतों पर खड़े लोग काल भैरव को मन्नत करते है कि कुछ सामान दिख जाए तो दिन बन जाएं - इन सब बारातियों...